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NDTV Losses Continue, Plans to Raise ₹800 Crore


अडाणी समूह द्वारा एनडीटीवी का अधिग्रहण पूरा होने के लगभग चार साल बाद भी यह समूह लगातार घाटे में चल रहा है. 26 अक्टूबर को जारी हुए ताज़ा वित्तीय नतीजों से पता चलता है कि भले ही राजस्व (रेवेन्यू) बढ़ा है और तिमाही का घाटा कुछ कम हुआ है, लेकिन कंपनी का कर्ज बढ़ गया है और अभी भी कंपनी घाटे में है. 

30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई तिमाही की तुलना पिछले साल की इसी तिमाही से करें तो एनडीटीवी को 63.51 करोड़ रुपये का कुल वास्तविक घाटा (कंसोलिडेटेड नेट लॉस) हुआ है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह घाटा 74.01 करोड़ रुपये था. चैनल का ऑपरेशंस से आने वाला रेवेन्यू लगभग 6 प्रतिशत बढ़ा है. यह 122.27 करोड़ रुपये से बढ़ कर 129.47 करोड़ रुपये हो गया है. लेकिन कुल खर्च लगभग उतना ही रहा. सितंबर तिमाही में कुल कंसोलिडेटेड खर्च 198.50 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 197.90 करोड़ रुपये था.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को दी गई वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, एनडीटीवी की प्रोडक्शन और सर्विस लागत लगभग 21 प्रतिशत बढ़ गई है. जो सितंबर, 2025 में 51.67 करोड़ रुपये थी, वह सितंबर 2026 में बढ़कर 62.44 करोड़ रुपये हो गई. इसी अवधि में कर्मचारियों पर होने वाला खर्च भी 46.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 50.30 करोड़ रुपये हो गया.

हालांकि, कंपनी ने अपने मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और प्रमोशनल खर्चों में काफी कटौती की है. सितंबर तिमाही में कंपनी ने 43.71 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह खर्च 58.06 करोड़ रुपये था. 

सितंबर तिमाही के नतीजों के साथ, एनडीटीवी के बोर्ड ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए अनसिक्योर्ड, नॉन-कन्वर्टिबल परपेचुअल डिबेंचर के माध्यम से 800 करोड़ रुपये तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. फंड जुटाने का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब एनडीटीवी लगातार घाटे में चल रहा है और कंपनी पर कर्ज काफी बढ़ गया है.

चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों (अप्रैल से सितंबर 2026) के दौरान, एनडीटीवी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (कुल राजस्व) 246.70 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 229.92 करोड़ रुपये था. रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी का घाटा थोड़ा बढ़कर 144.32 करोड़ रुपये से 145.39 करोड़ रुपये हो गया.

कंपनी की वित्तीय स्थिति भी खराब हुई है. मार्च, 2026 में एनडीटीवी की कंसोलिडेटेड टोटल इक्विटी 129.16 करोड़ रुपये (पॉजिटिव) थी, जो सितंबर 2026 तक घटकर -14.91 करोड़ रुपये (नेगेटिव) हो गई.

स्टैंडअलोन आंकड़े और भी चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं. एनडीटीवी की नॉन-करंट बॉरोइंग (सहायक कंपनियों को छोड़कर, कंपनी का लॉन्ग-टर्म कर्ज) मार्च, 2026 के 273.20 करोड़ रुपये के मुकाबले सितंबर में बढ़कर 376.26 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू रहा है. जबकि इसकी स्टैंडअलोन टोटल कैपिटल -162.85 करोड़ रुपये (नेगेटिव) रही.

राहुल कंवल के नेतृत्व में एनडीटीवी का प्रदर्शन कैसा रहा है?

राहुल कंवल 26 मई 2025 को सीईओ और एडिटर-इन-चीफ के तौर पर एनडीटीवी से जुड़े और उन्होंने बिजनेस और एडिटोरियल ऑपरेशंस की कमान संभाली. उनकी नियुक्ति दिसंबर, 2022 में अडाणी  समूह द्वारा एनडीटीवी का अधिग्रहण पूरा होने के दो साल से भी अधिक समय बाद हुई.

जब कंवल ने एनडीटीवी जॉइन किया, तब तक कंपनी अडाणी समूह के तहत अपने ऑपरेशन्स का विस्तार कर रही थी, जिसमें समूह के न्यूज बिजनेस को आकार देने में संजय पुगलिया ने अहम भूमिका निभाई थी. मार्च, 2025 में समाप्त हुए वर्ष के वित्तीय परिणाम, जिनकी घोषणा कंवल की नियुक्ति से एक महीने पहले की गई थी, बताते हैं कि एनडीटीवी का समेकित राजस्व 465.03 करोड़ रुपये और शुद्ध घाटा (नेट लॉस) 218.01 करोड़ रुपये रहा था.

एक साल बाद, मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए, एनडीटीवी का समेकित राजस्व बढ़कर 528.29 करोड़ रुपये हो गया, जो लगभग 13.6 प्रतिशत की वृद्धि है. लेकिन इसका समेकित शुद्ध घाटा भी काफी बढ़ गया. यह 218.01 करोड़ रुपये से बढ़कर 323.16 करोड़ रुपये हो गया, जो 48 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है. इसका मतलब यह है कि जहां एनडीटीवी का वार्षिक राजस्व लगभग 63 करोड़ रुपये बढ़ा, वहीं इसका शुद्ध घाटा 105 करोड़ रुपये से भी अधिक बढ़ गया.

कंपनी का समेकित खर्च भी वित्तीय वर्ष 2025 के 688.65 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2026 में 855.22 करोड़ रुपये हो गया, जो लगभग 166.57 करोड़ रुपये की वृद्धि है.

यह तुलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 वह पहला वित्तीय वर्ष था, जिसमें कंवल ने अधिकांश समय तक एनडीटीवी के बिजनेस और संपादकीय कार्यों का नेतृत्व किया. हालांकि, 2025 में वे वित्तीय वर्ष शुरू होने के लगभग दो महीने बाद जुड़े थे, और इन परिणामों में उनकी नियुक्ति से पहले लिए गए निर्णय और किए गए निवेश भी शामिल हैं.

अडाणी  द्वारा अधिग्रहण के बाद एनडीटीवी का वित्तीय प्रदर्शन

अडाणी समूह ने दिसंबर, 2022 में एनडीटीवी का अधिग्रहण पूरा किया. यह भारत के सबसे पुराने निजी समाचार प्रसारकों में से एक के स्वामित्व में एक बड़ा बदलाव था. अधिग्रहण के बाद, एनडीटीवी ने अपने समाचार कार्यों का विस्तार शुरू किया, जिसमें नए चैनल, प्रोग्रामिंग और वितरण शामिल थे.

मार्च, 2024 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए एनडीटीवी ने 370.01 करोड़ रुपये का समेकित राजस्व और 21.35 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया. वित्त वर्ष 25 में समेकित राजस्व बढ़कर 465.03 करोड़ रुपये हो गया लेकिन शुद्ध घाटा काफी बढ़कर 218.01 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. वहीं वित्त वर्ष 26 तक समेकित राजस्व 528.29 करोड़ रुपये हो गया जबकि शुद्ध घाटा बढ़कर 323.16 करोड़ रुपये हो गया.

इसी प्रकार, वित्त वर्ष 24 और वित्त वर्ष 26 के बीच एनडीटीवी का वार्षिक समेकित राजस्व लगभग 43 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि इसका वार्षिक शुद्ध घाटा 21.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 323.16 करोड़ रुपये हो गया.

लागत में वृद्धि के मुख्य कारणों में मार्केटिंग, वितरण और प्रचार पर होने वाला खर्च शामिल था. एनडीटीवी ने वित्त वर्ष 24 में इन गतिविधियों पर 92.54 करोड़ रुपये खर्च किए, जो वित्त वर्ष 25 में दोगुने से भी अधिक होकर 201.08 करोड़ रुपये हो गए. वित्त वर्ष 26 में यह खर्च और बढ़कर 243.29 करोड़ रुपये हो गया.

उत्पादन और सेवा लागत में भी काफी वृद्धि हुई; यह वित्त वर्ष 24 में 123.57 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 189.13 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 26 में 251.28 करोड़ रुपये हो गई.

कंपनी ने अपने कामकाज का विस्तार करना भी जारी रखा है. अगस्त 2026 में, एनडीटीवी ने ‘गुडटाइम्स’ चैनल का अधिग्रहण करने के लिए एक एसेट परचेज एग्रीमेंट (संपत्ति खरीद समझौता) पर हस्ताक्षर किए. इससे पहले, 1 अक्टूबर 2025 से, इसकी चार सहायक कंपनियों – एनडीटीवी नेटवर्क्स, एनडीटीवी वर्ल्डवाइड, एनडीटीवी मीडिया और एनडीटीवी लैब्स- का मूल कंपनी में विलय कर दिया गया था.

मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित ख़बर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.





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