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Kolkata Film Institute Uproar: Anti-National, Cockroach Remarks


“मैं अपने दोस्तों को बचाने गई थी, तभी एक आदमी ने मेरे सीने पर जोर से धक्का मारा.” सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट की छात्र परिषद की सदस्य पूर्वी उस पल को याद कर रही हैं, जब वह अपने दोस्तों को बचाने पहुंची थी. पूर्वी का आरोप है कि उन्हें धमकियां दी गई. पूर्वी के मुताबिक, “उन्होंने कहा अगर जिंदा बच गई तो सात दिन में कैंपस के अंदर ही देख लेंगे.” 

पूर्वी उन कुछेक छात्रों में शामिल हैं, जिनका आरोप है कि रविवार को कैंपस के भीतर उनके साथ मारपीट की गई और उन पर ईंट-पत्थर फेंके गए. यह घटना तब हुई, जब वह संस्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (अभाग्रांप) के एक कार्यक्रम का विरोध करने पहुंचे थे.

हालांकि, ग्राहक पंचायत के लोगों ने इन आरोपों से इनकार किया है. उनका दावा है कि छात्र परिषद के सदस्यों ने पहले उन पर हमला किया, जिसके बाद वे सिर्फ अपना बचाव कर रहे थे. सरकारी संस्थान में हुई झड़प में कई छात्र घायल हो गए. अब तक दर्ज की गई हैं. 

गौरतलब है कि संस्थान प्रशासन ने रविवार को ग्राहक पंचायत को चार घंटे की राज्य स्तरीय बैठक के लिए मुख्य सभागार इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी. 

छात्रों के एक वर्ग का कहना है कि कार्यक्रम को लेकर उनसे कोई सलाह नहीं ली गई और उन्हें उसी सुबह सभागार की बुकिंग के बारे में पता चला. छात्र प्रतिनिधि संस्था छात्र परिषद के सदस्य नचिकेत ने दावा किया कि कार्यक्रम को लेकर गेट पर कोई पोस्टर नहीं लगाया गया था और रजिस्ट्रार से संपर्क करने की परिषद की कोशिशों का भी जवाब नहीं मिला. 

छात्रों के मुताबिक, इसके बाद वे कार्यक्रम के विरोध में पोस्टर लगाने के लिए सभागार पहुंचे, जिसके बाद ये पूरा विवाद हुआ. 

कॉलेज के डीन सुकांता मजूमदार ने न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए कहा कि इस वक्त उनकी प्राथमिकता सभी छात्रों की सुरक्षा है. उन्होंने कहा कि बाद में देखा जाएगा कि कार्यक्रम किसने आयोजित किया था. उनके मुताबिक, “संस्थान की अपनी पॉलिसी है और उसी के तहत कार्यक्रम की अनुमति दी गई थी.”

मजूमदार ने बताया कि कार्यक्रम की अनुमति कॉलेज प्रशासन और रजिस्ट्रार ने दी थी. इसके बाद हमने एसआरएफटीआई के रजिस्ट्रार दीपक कुमार से बात करने की कोशिश की. हालांकि, उनसे हमारा संपर्क नहीं हो सका. 

वहीं, हाल ही में नियुक्त कुलपति संतोष अजमेरा ने घटना के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कि बच्चों ने हिंसा शुरू नहीं की थी और छात्रों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि संस्थान अपनी तरफ से पूरी मदद करने की कोशिश कर रहा है.

‘राजनीतिक कार्यक्रम के विरोध पर बने निशाना’

छात्र के मुताबिक, संस्थान में आरएसएस से जुड़े इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जबकि उनके संस्थान में इस तरह के कार्यक्रम पहले नहीं होते. इसी वजह से छात्र कार्यक्रम स्थल पर जाकर विरोध कर रहे थे. जिसके बाद दोपहर में दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई. छात्राओं का आरोप है कि वीडियो बनाने के दौरान उनके फोन छीनने की कोशिश की गई.

कॉलेज प्रशासन पर सवाल उठाते हुए पूर्वी कहती हैं कि कॉलेज ने छात्र परिषद के किसी भी सदस्य से पूछे बिना इस कार्यक्रम की अनुमति दी थी. “हम कॉलेज में बहुत सक्रिय हैं और हमारे लिए कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम कॉलेज में नागवार हैं क्योंकि ये एक फिल्म इंस्टीट्यूट है. इसके संसाधन छात्रों और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए हैं लेकिन ये इवेंट इनमें से किसी कैटेगरी में नहीं आता है.”

छात्र शिवम बताते हैं कि जब घटना हुई, तब वह अपने कमरे में थे. शिवम ने बताया, “बाहर से पत्थर फेंके जाने लगे और मेरे दोस्त के होंठ पर आकर लगा. कई और छात्र भी घायल हुए. मैं बाहर निकला तो देखा कि चार लोग मिलकर मेरे एक दोस्त की टी-शर्ट फाड़कर उसे मारने लगे. हमारे एक टीचर भी बच्चों को बचाने गए, जिसके बाद उन्हें भी चोट आई.”

शिवम के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को ‘बांग्लादेशी’ और ‘नक्सली’ कहा गया. साथ ही ‘तुम सबको लटका देंगे’ जैसी धमकियां दी गईं. उनका आरोप है कि लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की गई. 

शिवम बताते हैं, “हम किसी सेफ जगह पर जाने की कोशिश कर रहे हैं. अभी हमने खुद को स्टूडियो में बंद कर लिया है.”

छात्र परिषद के सदस्य नचिकेत का दावा है कि कॉलेज प्रशासन को अंदाजा था कि ऐसा कुछ हो सकता है. 

नचिकेत ने कहा, “जैसे ही परिषद को इस कार्यक्रम के बारे में पता चला तो रजिस्ट्रार से संपर्क किया लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद छात्र कार्यक्रम का विरोध जताने पहुंचे.” 

नचिकेत आगे कहते हैं कि थिएटर के गेट के पास उन्हें पकड़कर मारना शुरू कर दिया गया. छात्रों को पूरी बिल्डिंग में दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया और बाद में बड़े पत्थर भी फेंके गए. हमने पुलिस को लिखित शिकायत दी है.

झड़प में घायल हुए अथर्व शर्मा न्यूज़लॉन्ड्री को बताते हैं कि वह कार्यक्रम के विरोध में पोस्टर लगाने गए थे लेकिन वहां उन्हें ‘एंटी नेशनल’ और ‘कॉकरोच’ कहा जाने लगा.

अथर्व कहते हैं, “मामला गर्माने के बाद मुझे अपने लिए डर लगने लगा. मैं भागने लगा और पीछे करीब 20 लोग भाग रहे थे. फिर मैंने अपना फोन निकालकर रिकॉर्ड करना शुरू किया तो मेरा फोन छीनने की कोशिश की गई और मेरी टी-शर्ट फाड़ दी गई .. मेरे सिर पर किसी ने मुक्के से मारा इस वक्त उस हिस्से में सूजन है. मैं जान बचाकर लाइब्रेरी भागा लेकिन उन लोगों ने लाइब्रेरी का भी घेराव कर लिया. वहां कई बच्चे घायल हुए.”

अथर्व ने एक वायरल वीडियो में ग्रीन टी-शर्ट में दिखाई दे रहे घायल छात्र की भी पहचान की. उन्होंने बताया कि वह जयदीप हैं, जिस पर पत्थर फेंका गया था. उनके एक और साथी मेघराज पर किसी नुकीली चीज से वार किया गया. मेघराज भी छात्र परिषद के सदस्य हैं.

देर रात अपनी सुरक्षा के लिए कॉलेज में छिपे एक छात्र से हमने बात की. नाम गुप्त रखने की शर्त पर छात्र ने बताया कि उस वक्त भी कॉलेज के गेट के बाहर लोग मौजूद थे और कई छात्र अंदर फंसे हुए थे. “कुछ लोग शायद गेट तोड़ने की भी कोशिश कर रहे हैं और बाहर से पत्थर भी फेंके जा रहे हैं. आधे घंटे पहले कुछ घायल बच्चों को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया है.”

आरोपों पर ग्राहक पंचायत की सफाई

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की स्थापना 1974 में पुणे में हुई थी. यह संस्था खुद को उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा, जागरूकता फैलाने और देशभर में उपभोक्ताओं के शोषण को रोकने के लिए काम करने वाला एक स्वैच्छिक संगठन बताती है. यह संगठन वैचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा हुआ माना जाता है.

घटना को लेकर हमने ग्राहक पंचायत के पश्चिम बंगाल प्रांत के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार रॉय से बात की. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम शुरू होने के बाद 4-5 छात्र ऑडिटोरियम में आए. उन्होंने भारत माता की तस्वीर के पास एक पोस्टर चिपकाया. इस पर लिखा था, “हिंदू फासिज्म और एसआरएफटीआई स्टूडेंट्स यूनियन.”

राय बताते हैं, “इसके बाद हमारे कार्यकर्ताओं ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा कि आप आरएसएस के सदस्य हो. हम आपको मीटिंग नहीं करने देंगे. इसके बाद सैंकड़ों छात्र कमरे में आ गए. उन्होंने पोस्टर फाड़ दिए और हमें बाहर जाने के लिए मजबूर किया.”

रॉय का दावा है कि उन्हें व्हाट्सएप पर शिक्षकों की ओर से छात्रों की सराहना से जुड़े मैसेज मिले हैं. रॉय ने कहा कि उन्हें वहां ‘नक्सलियों का एक समूह’ जैसा नजर आया.

रॉय सवाल उठाते हुए कहते हैं, “हम उनके हॉस्टल में नहीं गए थे. हमने एक निश्चित समय के लिए हॉल किराये पर लिया था. हम वहां सिर्फ बाहर खड़े रहने के लिए नहीं गए थे, लेकिन हम कार्यक्रम शुरू ही नहीं कर पाए. सिर्फ फेलिसिटेशन हुआ था. डेलिगेट्स को दुर्गा की मूर्ति भेंट की गई थी, जिसे बाद में तोड़ दिया गया.” 

वहीं, संगठन के पश्चिम बंगाल सचिव और वकील जयंत भवाल कहते हैं, “संगठन के करीब 300 सदस्य पूरे पश्चिम बंगाल से कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. हमने ये एक अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित किया था. इसके लिए करीब 35,000 रुपये चार घंटे के लिए दिए गए थे. उन्होंने बताया कि लंच के लिए भी करीब 45 हजार रुपये अलग से दिए गए थे.”

जयंत भवाल के मुताबिक, “जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, कुछ लड़के वहां आए और हमारे पोस्टर पर अपना पोस्टर चिपका दिया. हमारे साथ महिलाएं भी थीं. हमें नहीं पता कि वो छात्र थे या कौन थे. हमारे भी लोगों की उंगली काट दी गई और लोग घायल हुए.” 

जब हमने उनसे घायल छात्रों के वीडियो और तस्वीरों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ये सब सिर्फ आरोप हैं और उनके पास भी वीडियो हैं, जिन्हें वे सामने रखेंगे.

वहीं, संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य विजय सागर ने कहा कि यह बैठक उपभोक्ता अधिकारों और कानूनों पर कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम था. उन्होंने कहा, “छात्र इस बात से नाराज थे कि हमें सभागार इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों दी गई और उन्होंने पहले हम पर हमला किया.”

उन्होंने कहा, “हमने किसी को धमकाया या उकसाया नहीं था. लेकिन जब हमारे साथ हिंसा हुई तो हमसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि हम जवाब नहीं देंगे.”

सागर ने इस आरोप से भी इनकार किया कि अभाग्रांप के सदस्यों ने पत्थर फेंके थे. उन्होंने कहा, “हम हिंसा में विश्वास नहीं करते. हम सिर्फ संवाद में विश्वास करते हैं.”

घटना के बाद राजनीति गरमाई

उधर, घटना के बाद पश्चिम बंगाल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में छात्रों पर लगाया कि वे ‘अर्बन और दिमागी नक्सल’ हैं, जो कार्यक्रम स्थल में घुस आए और पोस्टर फाड़ दिए. 

उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया और लिखा, “दिमागी नक्सल स्वामी विवेकानंद की तस्वीर पर लात मार रहे हैं, थूक रहे हैं और उसे फाड़ रहे हैं.” 

उधर, छात्र परिषद के नचिकेत ने कहा कि मीडिया में उनके खिलाफ गलत और झूठी जानकारी चलाई जा रही है. उन्होंने कहा, “हम किसी भी संगठन से जुड़े हुए नहीं हैं. मीडिया में हमारे खिलाफ झूठा नैरेटिव चलाया जा रहा है.” 

उनका कहना है कि कई न्यूज पोर्टल ने एसआरएफटीआई के छात्रों को एसएफआई से जोड़कर खबरें चलाईं. नचिकेत ने कहा, “हम सिर्फ एक सक्रिय छात्र संगठन हैं, जो छात्रों के हित के लिए काम करता है.” 

वहीं, कोलकत्ता पुलिस ने झड़प के बाद आज सुबह इस मामले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं. न्यूज़लॉन्ड्री ने एफआईआर से जुड़ी जानकारी के लिए पुलिस की वेबसाइट पर दिए गए पंचसायर थाने के एसएचओ के फोन नंबर पर संपर्क किया. फोन उठाने वाले अधिकारी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. 





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