यूपी का सूचना विभाग या राजनीतिक प्रचार का तंत्र? चार एजेंसियों की पड़ताल
अखिलेश यादव राम मंदिर नहीं गए, इफ्तार में इस्लामिक टोपी पहनते हैं और दलितों का अपमान करते हैं. ये कुछ ऐसे संदेश हैं, जो उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के एक प्रमुख व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किए गए. इस ग्रुप में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सरकार द्वारा नियुक्त चार निजी पीआर एजेंसियों के सदस्य भी शामिल हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री की पड़ताल में सामने आया है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के प्रचार के लिए जिम्मेदार सूचना विभाग और उससे जुड़ी एजेंसियां विपक्ष को हिंदू विरोधी दिखाने वाली सामग्री पर भी काम कर रही हैं.
इन एजेंसियों के साथ काम कर चुके लोगों ने बताया कि इस तरह की सामग्री तैयार करने के निर्देश विभाग की ओर से दिए जाते हैं. एक पूर्व सहयोगी के मुताबिक, सरकारी खजाने से भुगतान होने के बावजूद कई अभियान सत्ताधारी पार्टी के लिए तैयार किए जाते हैं और विपक्ष को बदनाम करने के मकसद से चलाए जाते हैं.
पड़ताल में यह भी सामने आया कि पिछले तीन हफ्तों में यूट्यूब पर ऐसे कम से कम 20 चैनल मिले, जो इसी तरह की सामग्री चला रहे थे. इन चार निजी एजेंसियों में से एक का संबंध एप्को वर्ल्डवाइड से भी रहा है. इसी लॉबिंग फर्म के बारे में खबरें आई थीं कि उसने 2002 के गुजरात दंगों के बाद नरेंद्र मोदी की छवि को नए सिरे से गढ़ने में मदद की थी.
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